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Posts by Georgina Roy

आध्यात्मिकता पर कोई पुस्तक कैसे लिखें

By on मार्च 17, 2017 in Non-Fiction, Writing Tips

आध्यात्मिकता विश्व में सबसे अधिक ढूँढ़ी जाने वाली विधाओं में से एक है, क्योंकि इनकी निरंतर आवश्यकता रहती है। जीवन वास्तव में तेजी से हमें छोड़ कर आगे निकल जाता है और कभी-कभी, हमें धीमें होने और अपनी आंतरिक शांति की खोज करने की आवश्यकता होती है। तथापि, आप ऐसे ही बैठ कर आध्यात्मिक धरातल में अपने व्यक्तिगत अनुभवों के संबंध में नहीं लिख सकते, चाहे उनमें स्वयं या जगत में...

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अपनी पुस्तकों को सही उपाय से विक्रय कैसे करें

By on मार्च 17, 2017 in Writing Tips

एक बार जब आपने पुस्तक लिख लिया है, तब इसे दुनिया को दिखाने का समय आ गया है। यदि आपने किसी प्रकाशन गृह के साथ सौदा नहीं किया है, तब अपनी पुस्तक के प्रचार-प्रसार और विपणन का दायित्व स्वीकार करने के लिए तैयार रहिए। आज के ई-पुस्तकों और स्वयं-प्रकाशन के दिन और युग में, आप इस तथ्य पर स्तंभित हो सकते हैं कि कभी-कभी, चाहे विषय-वस्तु कितनी भी अच्छी क्यों न हो, विक्रय में...

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आपके अग्रणी में अधूरापन रहना क्यों आवश्यक है इसके 5 कारण

By on मार्च 17, 2017 in Fiction, Writing Tips

यह जीवन का तथ्य है कि लोग अधूरे होते हैं। यथार्थ जीवन में, हममें त्रुटियाँ, असुरक्षा की भावनाएँ और आशंकाएँ होती हैं जो कभी-कभी हमारे दैनंदिन जीवन पर हावी हो जाती हैं और हमारा अंश बन जाती हैं।  कल्पना-साहित्य लिखते समय, किसी संपूर्ण अग्रणी की सृष्टि के फंदे में पड़ना आसान है जो हमेशा आत्मविश्वासी, आत्मचेतन है और कोई भी गलती नहीं करता है।  फिर भी, यह स्मरण रखना आवश्यक...

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आपके उपन्यास के लिए 5 पुस्तक रूपरेखा गुर

By on मार्च 11, 2017 in Writing Tips

पाठक आपके उपन्यास की पहली धारणा निम्नलिखित अनुक्रम में बनाता है: पहली धारणा पुस्तक के आवरण और शीर्षक से बनती है (यह दोनों सर्वदा साथ चलते हैं), और उसके बाद यह पुस्तक परिचय से, और तब विषय-वस्तु से। इससे पहले कि पाठक आपके द्वारा सृष्टि किए संसार में और पात्रों में डूब जाएँ, उन्हें पृष्ठों की कोई मात्रा पढ़नी पड़ती है। यदि आप मानें तो यह पृष्ठ शब्दों से भरे हैं, और कुछ...

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5 सर्वनिष्ठ लेखन मिथक

By on फरवरी 28, 2017 in Writing Tips

लेखन मिथक लेखन के संबंध में तथाकथित सार्वलौकिक सत्य हैं, जिनका अनुसरण “प्रत्येक लेखक को जानना चाहिए” शब्दों से किया जाता है। यदि उनके संबंध में कुछ भी सार्वलौकिक है,  तो वह है क्षति  जो आपकी रचनात्मक प्रक्रिया और आपके उस संकल्प पर की जाती है जो आपके विचारों को अपने आगे कोरे पृष्ठ पर रखते हैं। इनमें से कई निरुत्साहित करने वाले और अत्यंत घातक हो सकते हैं  – इस अर्थ...

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